आज राखी का त्योहार है और मैं अपने भाईयों से बहुत दूर हूँ। उन्हे प्रत्यक्ष रूप से राखी तो नहीं बाँध सकती इसलिये पहले ही दे कर आयी थी। अच्छा नही लगता है इस त्योहार मे दूर रहना। सब भाई बहन इसे अपने-अपने तरीके से मनाते हैं। भाई बहन को कुछ उपहार देते है और बहनें उनकी उन्नति की कामना करती हैं।
मेरे बड़े भाई साहब जो कि दिल्ली मे रहते हैं उन्हे मैने सुबह ८.०० बजे फोन किया पर फोन नही उठाया. मेरे भाई साहब ने भी मेरी राकी की तरह उपहार भी पहले ही दे दिया था. उपहार मे उन्होने मुझे चाय का मग दिया ये बोल कर कि तुम चाय ज्यादा पीती हो, ये तुम्हारे लिये! उपहार देख कर मेरी आँख भर आयी। छोटे भाई ने रात के १२.०० बजे ही फोन करके Happy Rakhi बोल दिया था.
इसके पहले भी मैं राखी पर घर नही जाया करती थी क्यूंकि हमें केवल एक दिन की ही छुट्टी मिलती थी। कमी तो हमेशा से ही लगती थी पर आज ये कमी कुछ ज्यादा ही महसूस हो रही है। आज राखी के दिन मै यही दुआ करती हूँ कि मै कहीं भी रहूँ और मेरे भाई कहीं भी रहें वो सदा खुश रहें एवं उन्नति-प्रगति करें।
सभी भाई-बहनों को राखी की शुभकामनायें।


3 comments
संगीता पुरी says:
August 24, 2010 at 01:08 (UTC -4)
बढिया .. आपको रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !!
माधवेन्द्र शुक्ला says:
August 25, 2010 at 05:53 (UTC -4)
इतने अमूल्य शब्दों से आपने मेरा अभिवादन किया है….. आँखों में आंसू आने को बेकरार है| लीजिये ये भी हो ही गया | वैसे हमारे कप में चाय और ताज़गी देती होगी.. है न | सोचता हूँ की मै आज आपको कुछ बता दूँ | आपने जब जब मुझे राखी भेजी मैंने उन्हें पहना नहीं सिर्फ रख लेता हूँ यादगार के तौरपर | मेरी कलाईयों पर तभी राखी बधेगी जब आप बाँधेगी | आप से मतलब तीनों का है |
बहुत शुक्रिया….
Archana says:
August 25, 2010 at 19:00 (UTC -4)
Wow Mishraji you are so lucky to get a talented wife like Rehka..she is literally good at it.